Posts

भूत से साक्षात्कार बजरिए विजयगढ़ किला

Image
vijaigarh fort पुरातत्व व संस्कृति ‘तत्व ही तत्व हैं हर ओर हर ओर नहीं होते आदमी हर आदमी, आदमी नहीं होता जो आदमी नहीं होता  वह भी होता है कुछ कुछ क्या होता है होता हो शायद तत्व का पुरातत्व जहां पुरातत्व होता है वहां नहीं होते आदमी जहां नहीं होते आदमी वहां होते है तत्  जन-मन की हत्यारी  वृत्तियों-प्रवृत्तियांे को   जो बना देते हैं आदमी को पुरा-आदमी या पुरातत्व.....’ भूत से साक्षात्कार बजरिए विजयगढ़ किला नई सदी का प्रारंभ, जाड़े की गुन-गुनी धूप सेंकने की गरज से मैं चारपाई पर   अधलेटा हुआ था एवं हंस का ताजा अंक पढ़ रहा था। उसमें से सीखों का सिखाने की बारीकियां को चुन रहा था कि बाउण्ड्री के छोटे से फाटक ने खट किया, बाहर फाटक पर आकाशवाणी ओबरा के कृषि कार्यक्रम अधिकारी सुशील राय जी खड़े थे, उनके साथ में आकाश वाणी के ही निराला जी भी एक टक मेरी तरफ ताक रहे थे। मैं था कि केवल चढ़डी के साथ, कम्बखत लुंगी भी ऐन वक्त पर अपनी गांठे खोल मुझे नंगा कर जाती है। झट लुंगी सहेजा, दौड़ा फाटक की तरफ हाहाकारी दुआ-सलाम, आइए भाई आइए! अरे! उधर देखिए निदेशक महोदय जीप पर हैं, यानि कि कोत...